Rishabh Pant कभी नहीं बन सकते हैं अच्छे कप्तान, ये 3 बातें दे रही हैं साफ गवाही

Rishabh Pant कभी नहीं बन सकते हैं अच्छे कप्तान, ये 3 बातें दे रही हैं साफ गवाही

 क्रिकेट न्यूज डेस्क।।  भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant)  लिमिटेड ओवर फॉर्मेट में अपनी बल्लेबाजी के अंदाज को लेकर आलोचकों के निशाने पर रहते हैं। लेकिन अब बतौर कप्तान भी उनके ऊपर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, आईपीएल में 2 सीजन दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी करने के अनुभव के साथ ऋषभ पंत को मौजूदा भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका सीरीज में दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी में कप्तानी का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन वे अभी तक खुद को इस नई जिम्मेदारी के काबिल साबित नहीं कर पाए हैं। भारतीय टीम को ऋषभ पंत  की अगुवाई में घरेलू टी20 सीरीज में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार 2 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। फिलहाल टीम इंडिया इस सीरीज में 2-1 से पिछड़ी हुई। जिसका मुख्य जिम्मेदार ऋषभ पंत की कप्तानी को माना जा सकता है, आइए जानते ऋषभ पंत अच्छे कप्तान क्यों नहीं बन सकते हैं।

टॉस में किस्मत नहीं देती Rishabh Pant का साथ

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क्रिकेट के खेल में काबिलियत के साथ खिलाड़ी की किस्मत की भी अहम भूमिका रहती है। तमाम कौशल  और अच्छे फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को भी किस्मत के साथ की आवश्यकता होती है। अगर कप्तान किस्मत का धनी हो तो इसका फायदा पूरी टीम  मिल सकता है, वहीं अगर कप्तान इस मामले में संघर्ष करे तो टीम की मुसीबत बढ़ना लाजमी है। ऋषभ पंत (Rishabh Pant) बतौर कप्तान टॉस जीतने में बेहद खराब रिकॉर्ड रखते है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वे अभी तक हुए 3 मैचों में एक भी बार टॉस जीतने में कामयाब नहीं हुए हैं। वहीं उनके टॉस हारने का सिलसिला आईपीएल 2022 से ही चलता आ रहा है। कई मुकाबलों में टॉस से ही मैच की रूप रेखा तैयार हो जाती है।

बल्लेबाजी में दिख रहा है कप्तानी का दबाव

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ऋषभ पंत ने 2016 में इंडियन प्रीमियर लीग में पदार्पण किया था। शुरुआती सालों में उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करके अपनी छवि बनाई। लेकिन इन वर्षों में, ऋषभ की विस्फोटक बल्लेबाजी शैली बदल गई है और उनका स्ट्राइक रेट गिर गया है। साल 2021 में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी करने के बाद ऋषभ पंत ने सिर्फ 128 स्ट्राइक आउट के साथ बल्लेबाजी की है। इसके अलावा उन्हें कई मौकों पर गंभीर हालत में सस्ते में अपना विकेट गंवाते हुए देखा गया है। इससे उनकी बल्लेबाजी में कप्तानी के भार का साफ पता चलता है।

जमीनी फैसलों पर उठते हैं सवाल

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ऋषभ पंत की कप्तानी की सबसे बड़ी कमी यह है कि वह अपने गेंदबाजों का सही इस्तेमाल करने में नाकाम रहे हैं। अक्सर मैदान पर कुछ ऐसे फैसले ले लेते हैं जो उनके पक्ष में नहीं होते। इसका सबसे बड़ा उदाहरण आईपीएल 2021 का फाइनल है, जब उन्होंने चेन्नई के खिलाफ कगिसो रबाडा की जगह टॉम कुरैन को गेंद सौंपी थी। साथ ही, आईपीएल 2022 के दौरान, यह देखा गया कि ऋषभ पंत कुलदीप यादव के कोटे को पूरा नहीं कर पाए, जिन्होंने इस सीजन में कई मैचों में दिल्ली के लिए सबसे अधिक विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऋषभ पंत ने वही गलती दोहराई जबकि युजवेंद्र चहल केवल 2 ओवर ही कर पाए।

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